गुदगुदी करना बच्चों के लिए मजेदार लग सकता है, लेकिन ज्यादा गुदगुदी उनकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है। रिसर्च के मुताबिक, यह उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। माता-पिता को इस आदत से बचना चाहिए और बच्चों को हंसाने के अन्य सुरक्षित तरीके अपनाने चाहिए। आइए जानते हैं कि गुदगुदी बच्चों को कैसे नुकसान पहुंचा सकती है।
गुदगुदी करने पर बच्चा हंसता जरूर है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह सच में खुश हो। कई बार गुदगुदी इतनी तीव्र होती है कि बच्चा हंसने के अलावा कुछ और कर ही नहीं पाता। यह हंसी स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है, न कि खुशी का इजहार।
लगातार गुदगुदी करने से बच्चे की सांस फूल सकती है और उसे घबराहट महसूस हो सकती है। छोटे बच्चों के लिए यह अधिक खतरनाक हो सकता है क्योंकि उनकी श्वसन प्रणाली इतनी मजबूत नहीं होती है।
गुदगुदी के दौरान बच्चा खुद को बचाने में असमर्थ महसूस कर सकता है। इससे उसकी ‘ना’ कहने की क्षमता कमजोर हो सकती है। लंबे समय तक ऐसा होता रहे तो बड़े होने पर भी वह अपनी असहजता जाहिर करने में मुश्किल महसूस कर सकता है।
कुछ बच्चों को ज्यादा गुदगुदी करने से डर और बेचैनी महसूस हो सकती है। इससे उनमें असुरक्षा की भावना विकसित हो सकती है और वे अपनी बॉडी पर नियंत्रण खोने का अहसास कर सकते हैं।
लगातार गुदगुदी करने से मांसपेशियों पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है, जिससे उनमें दर्द या ऐंठन की समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए माता-पिता को गुदगुदी करने की आदत को सीमित रखना चाहिए।
गुदगुदी एक सामान्य खेल हो सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा करने पर यह बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसलिए सावधान रहें और बच्चों को हंसाने के लिए बेहतर और सुरक्षित तरीके अपनाएं।