मार्च 2025 में होली के शुभ अवसर पर एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना घटित होगी—चंद्र ग्रहण। यह दिन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ खगोल विज्ञान के लिए भी विशेष रहेगा। होली के दिन चंद्र ग्रहण का संयोग दुर्लभ माना जाता है, जिससे यह घटना और भी खास बन जाती है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि यह ग्रहण कब और कहां दिखाई देगा, इसका सूतक काल रहेगा या नहीं, और इससे जुड़ी सेहत संबंधी सावधानियां क्या हैं।
चंद्र ग्रहण कब होगा?
मार्च 2025 का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण 14 मार्च को होगा। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में आ जाएगा।
ग्रहण का समय (Chandra Grahan Timing)
यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा, लेकिन उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इसे साफ देखा जा सकेगा। चूंकि भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।
सूतक काल तब लागू होता है जब ग्रहण भारत में दिखाई देता है। लेकिन चूंकि यह चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसका अर्थ यह है कि होली का उत्सव बिना किसी धार्मिक प्रतिबंध के मनाया जा सकता है।
भारत में चंद्र ग्रहण को धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:
चंद्र ग्रहण से जुड़ी कुछ वैज्ञानिक और पारंपरिक सावधानियां इस प्रकार हैं:
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर के अंदर रहने और भारी काम करने से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण की किरणें गर्भस्थ शिशु पर प्रभाव डाल सकती हैं।
यद्यपि चंद्र ग्रहण सूर्य ग्रहण की तरह हानिकारक नहीं होता, फिर भी इसे टेलीस्कोप या अन्य सुरक्षित साधनों से देखना बेहतर होता है।
कुछ मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान भोजन और पानी का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय बैक्टीरिया की वृद्धि हो सकती है। हालांकि, यह वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह प्रमाणित नहीं है।
ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना और घर की सफाई करना शुभ माना जाता है। यह धार्मिक और मानसिक शुद्धि का प्रतीक होता है।
ग्रहण के दौरान ध्यान और योग करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
चंद्र ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जो तब होती है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं। इस स्थिति में सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर पड़ता है, लेकिन चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता, जिससे चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में आ जाता है। इस घटना को पूर्ण चंद्र ग्रहण कहा जाता है।