मुख्य बातें:
भारत में अब तक ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) के 18 मामले दर्ज किए गए हैं।
घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह गंभीर खतरा पैदा नहीं करेगा।
HMPV और COVID-19 में समानताएं होने के बावजूद दोनों अलग-अलग वायरस हैं।
नई दिल्ली: देश में इन दिनों ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। अब तक इसके 18 मामले सामने आ चुके हैं। COVID-19 महामारी के पांच साल बाद एक और वायरस की चर्चा लोगों में चिंता का विषय बन रही है।
हालांकि, विशेषज्ञों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि HMPV से डरने की आवश्यकता नहीं है। यह वायरस कोरोना की तरह है, लेकिन इसका प्रभाव अलग है और घातक नहीं है।
HMPV और COVID-19: अंतर और समानताएं
संक्रमण का प्रभाव:
दोनों वायरस श्वसन तंत्र (रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट) को प्रभावित करते हैं, जिससे ऊपरी और निचले श्वसन तंत्र में संक्रमण हो सकता है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग इनसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं।
संक्रमण का प्रसार:
दोनों वायरस खांसने-छींकने से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स, संक्रमित सतहों को छूने और संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क से फैलते हैं।
लक्षण:
दोनों में बुखार, सर्दी और खांसी जैसे शुरुआती लक्षण सामान्य हैं। हालांकि, गंभीर मामलों में लक्षणों में बदलाव हो सकता है।
फैलने का समय:
HMPV ठंड के अंत और वसंत के शुरुआती महीनों में सक्रिय रहता है, जबकि कोरोना वायरस आमतौर पर ठंड के मौसम में अधिक प्रभावी होता है।
HMPV और COVID-19 में प्रमुख अंतर:
पहचान का समय:
HMPV पहली बार 2001 में खोजा गया था, जबकि COVID-19 का पहला मामला 2019 में सामने आया।
बीमारी की अवधि:
HMPV के हल्के मामलों में लक्षण कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ्तों तक रहते हैं, जबकि COVID-19 के लक्षण कई हफ्तों या महीनों तक बने रह सकते हैं।
वैक्सीन उपलब्धता:
COVID-19 के लिए टीके और एंटीवायरल दवाएं मौजूद हैं। HMPV के लिए अभी तक कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसके इलाज में केवल सावधानी और देखभाल ही सहायक है।
निष्कर्ष:
HMPV के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह वायरस गंभीर चिंता का कारण नहीं बनेगा। सतर्कता और स्वच्छता अपनाकर इससे बचाव संभव है।