सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसमें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, हिमाचल प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश और कर्नाटक हाईकोर्ट की जस्टिस शामिल हैं। इसके बाद, जस्टिस वर्मा से सभी न्यायिक कार्यों को वापस ले लिया गया है।
1. भविष्य में क्या होगा?
समिति की रिपोर्ट के बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ कदाचार की स्थिति की जांच की जाएगी। यदि गंभीर अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो सीजेआई उन्हें इस्तीफा देने के लिए कह सकते हैं। यदि वे इस्तीफा नहीं देते, तो महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
2. जज को हटाने की प्रक्रिया
1999 में सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों से निपटने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके तहत, अगर किसी न्यायाधीश के खिलाफ आरोप सही पाए जाते हैं, तो उन्हें इस्तीफा देने के लिए कहा जा सकता है। यदि वे इस्तीफा नहीं देते, तो महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
3. क्या कभी किसी जज पर महाभियोग लगाया गया है?
अब तक भारत में किसी न्यायाधीश को महाभियोग के जरिए पद से हटाने का मामला नहीं आया है। हालांकि, कुछ न्यायाधीशों को महाभियोग की प्रक्रिया का सामना करना पड़ा है, लेकिन वे इस्तीफा देने से पहले प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई।
4. 23 मार्च को जले हुए नोटों की बरामदगी
23 मार्च को जस्टिस वर्मा के सरकारी बंगले के पास कूड़े के ढेर में 500-500 रुपये के जले हुए नोट मिले, जिससे यह मामला और भी संवेदनशील हो गया। इस पर कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि वे जांच समिति की रिपोर्ट के बाद इस पर प्रतिक्रिया देंगे।