प्रयागराज महाकुंभ में मौनी अमावस्या से पहले हुई भगदड़ में 30 श्रद्धालुओं की जान चली गई। यह घटना पूरे देश के लिए गमगीन करने वाली थी, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि मौनी अमावस्या के दिन भगदड़ की यह अकेली घटना नहीं थी। भीड़ के अत्यधिक दबाव के कारण तीन अलग-अलग स्थानों पर भगदड़ मची, जिसमें कई लोग घायल हो गए। बावजूद इसके, प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है।
पहली भगदड़ की घटना संगम नोज पर रात एक बजे हुई, जब श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के इंतजार में वहीं रुक गए थे। भीड़ बढ़ने से बैरिकेडिंग टूट गई और भगदड़ मच गई। सो रहे लोग अचानक मची अफरा-तफरी में कुचले गए। इस भयावह हादसे में 30 लोगों की मौत हो गई। इस घटना के दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं।
दूसरी भगदड़ संगम नोज की घटना के करीब डेढ़ से दो घंटे बाद महावीर मार्ग पर हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात करीब तीन बजे भगदड़ मची, जो सुबह नौ बजे तक नियंत्रित नहीं हो सकी। वहां मौजूद सुरक्षा बलों की संख्या बेहद कम थी, जिससे स्थिति बिगड़ती चली गई। कई लोग जान बचाने के लिए दुकानों और स्टॉल में शरण लेने को मजबूर हो गए। कुछ चश्मदीदों ने बताया कि लोग पानी तक के लिए तरस रहे थे। घटनास्थल पर चप्पलें, बैग और कपड़े बिखरे पड़े थे, जिससे वहां की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
तीसरी भगदड़ दोपहर में फाफामऊ इलाके के पांटून ब्रिज पर हुई। अत्यधिक भीड़ के कारण पुल पर लगी लकड़ियां टूट गईं, जिससे वहां भगदड़ जैसे हालात बन गए। पुल पूरी तरह से श्रद्धालुओं से भरा था, और जैसे ही लकड़ियां टूटीं, लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे। इस घटना में भी दर्जनों लोगों के घायल होने की खबर है। वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि हादसे के समय वहां कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था।
इन तीनों घटनाओं के बावजूद प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। सुरक्षा इंतजामों की भारी कमी और भीड़ नियंत्रण में लापरवाही की वजह से ये हादसे और भयावह हो गए।