
मुँह का कैंसर (ओरल कैंसर) के लक्षण व्यक्ति विशेष में अलग-अलग हो सकते हैं। केवल एक लक्षण के आधार पर कैंसर का निदान नहीं किया जा सकता, लेकिन यदि मुँह में कोई घाव लंबे समय तक ठीक न हो, गांठ बन जाए, लाल या सफेद धब्बे दिखें, या चबाने-निगलने में परेशानी हो, तो यह संभावित संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।

ओरल कैंसर मुँह के अंदर जीभ, होंठ, मसूड़े, गाल, तालू और गले के ऊपरी हिस्से को प्रभावित करता है। यह प्रारंभ में सफेद या लाल धब्बों, घावों या सूजन के रूप में प्रकट हो सकता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह सिर और गर्दन के अन्य भागों में फैल सकता है।
आंकड़ों के अनुसार, लगभग 63% मरीज यदि समय पर उचित इलाज प्राप्त करें, तो निदान के बाद पाँच वर्षों तक जीवित रह सकते हैं।
- मुँह या होंठों में ऐसा घाव जो हफ्तों तक ठीक न हो।
- दर्दरहित या दर्द के साथ बना रहने वाला अल्सर।
- होंठ, मसूड़े, गाल या जीभ में असामान्य गांठ या कठोरपन।
- मसूड़ों, जीभ, टॉन्सिल या मुँह के अंदर सफेद या लाल रंग के धब्बे।
- कभी-कभी इन धब्बों से खून आ सकता है।
- चबाने या निगलने में परेशानी होना।
- जबड़े या जीभ को हिलाने में कठिनाई।
- आवाज में बदलाव या बोलने में समस्या।
- होंठ, जीभ या मुँह के किसी हिस्से में सुन्नपन।
- अकारण लगातार दर्द रहना।
- बिना किसी कारण दाँतों का ढीला होना।
- मसूड़ों में सूजन या दाँतों के पास दर्द।
- बिना वजह जबड़े में सूजन या कठोरता।
- मुँह को पूरी तरह खोलने में परेशानी।
- गले या गर्दन के पिछले हिस्से में गांठ या सूजन।
- बिना किसी ज्ञात कारण के तेजी से वजन कम होना।
- धूम्रपान, गुटखा, पान-मसाला और शराब का सेवन न करें।
- ये आदतें कैंसर के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
- विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हरी सब्जियाँ और फल खाएँ।
- प्रोसेस्ड और अधिक तली-भुनी चीज़ों से बचें।
- दैनिक रूप से दाँतों की सफाई करें और मुँह धोएँ।
- नियमित रूप से डेंटल चेकअप करवाएँ।
- धूप में अधिक समय बिताने से होंठों का कैंसर हो सकता है।
- सनस्क्रीन युक्त लिप बाम का उपयोग करें।
- मुँह में किसी भी असामान्य बदलाव पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
- प्रारंभिक जाँच और उपचार जान बचा सकता है।