ग्रेटर नोएडा में एक दिल दहला देने वाली घटना में, एक महिला की मौत रेबीज के कारण हो गई, और यह संक्रमण गाय के दूध से हुआ था। गाय को पहले एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था, जिसके बाद उसे रेबीज हो गया। इसी गाय का दूध पीने के कुछ दिनों बाद महिला में रेबीज के लक्षण दिखाई देने लगे और बाद में उनकी मौत हो गई।
रेबीज एक खतरनाक और जानलेवा वायरल बीमारी है, जो आमतौर पर संक्रमित जानवरों के काटने या चाटने से फैलती है। इस बीमारी का मुख्य कारण Lyssavirus है, जो मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह मौत का कारण बन सकता है।
रेबीज के लक्षण आमतौर पर इन्फेक्शन के 1 से 3 महीने बाद दिखाई देते हैं, लेकिन कभी-कभी यह कुछ दिनों से लेकर एक साल तक भी देर से प्रकट हो सकते हैं। कुछ प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:
बुखार
सिरदर्द
थकान और कमजोरी
मांसपेशियों में दर्द
काटे गए स्थान पर खुजली, दर्द या सुन्नता
मानसिक असंतुलन और घबराहट
ज्यादा लार आना
निगलने में कठिनाई (हाइड्रोफोबिया)
मांसपेशियों में ऐंठन और पैरालिसिस (पंगुता)
कोमा
रेबीज से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
पालतू जानवरों का टीकाकरण: अपने पालतू जानवरों, जैसे कुत्तों और बिल्लियों, को रेबीज से बचाव के लिए नियमित रूप से टीका लगवाएं।
जंगली और आवारा जानवरों से दूरी: जंगली या आवारा जानवरों से बचें, खासकर यदि वे अजीब व्यवहार कर रहे हों, क्योंकि रेबीज से संक्रमित जानवर आक्रामक होते हैं।
काटे जाने पर तुरंत कदम उठाएं: अगर किसी जानवर ने काट लिया है, तो घाव को तुरंत साबुन और पानी से धोएं और डॉक्टर से संपर्क करें।
पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP): अगर रेबीज का खतरा हो, तो डॉक्टर टीका और इम्युनोग्लोबुलिन देने की सलाह दे सकते हैं, जो इन्फेक्शन से बचाव में मदद करता है।
जागरूकता फैलाएं: लोगों को पालतू जानवरों की वैक्सीनेशन और जंगली जानवरों से सावधानी बरतने के बारे में जागरूक करें।
बच्चों को सुरक्षा सिखाएं: बच्चों को जानवरों के साथ सुरक्षित व्यवहार करना और आवारा जानवरों से दूर रहना सिखाएं।
यह घटना एक चेतावनी है कि हमें रेबीज जैसे गंभीर संक्रमण के प्रति जागरूक रहना चाहिए और हर संभव कदम उठाना चाहिए ताकि इससे बचाव हो सके।