राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान का 25वां वार्षिकोत्सव मनाया, विशेष डाक टिकट और आवरण जारी किए गए
शि.वा.ब्यूरो, अहमदाबाद। भारतीय डाक विभाग के द्वारा आयोजित राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान के 25वें वार्षिकोत्सव पर एक कस्टमाइज्ड डाक टिकट और एक विशेष आवरण व विरूपण जारी किया गया। यह आयोजन साइंस सिटी के विज्ञान भवन में हुआ, जिसमें चीफ पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग राज्य मंत्री जगदीश विश्वकर्मा और राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान के अध्यक्ष प्रो. अनिल सहस्त्रबुद्धे ने मिलकर इन विशेष सामग्री को जारी किया।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राज्य सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग राज्य मंत्री जगदीश विश्वकर्मा ने कहा कि गुजरात राज्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में लगातार नई तकनीकों को अपनाते हुए नए-नए नवाचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत निरंतर नए आयाम स्थापित कर रहा है और उद्योग जगत को भी इन नवाचारों का भरपूर लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की दृष्टि से स्किल डेवलपमेंट, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जैसी योजनाओं ने नए रोजगारों को उत्पन्न किया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय डाक विभाग द्वारा इस उत्सव पर डाक टिकट और विशेष आवरण जारी कर इस संस्थान के महत्व को शानदार तरीके से प्रदर्शित किया है।
चीफ पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि गुजरात की राजधानी गांधीनगर में स्थित ग्रामभारती अमरापुर में राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान ने अपने 25 वर्षों के सफर में नवाचार और सृजनात्मकता को बढ़ावा देते हुए नवप्रवर्तकों को सशक्त किया है और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने यह भी कहा कि यह कस्टमाइज्ड डाक टिकट और विशेष आवरण न केवल नवाचार को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के उद्देश्य के लिए स्थायी और दीर्घकालिक समाधानों को भी समर्थन प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा कि डाक टिकट किसी भी राष्ट्र की संस्कृति, सभ्यता और धरोहर का संवाहक होता है और समाज में हो रहे विकास को डाक टिकटों के माध्यम से देखा जा सकता है। इस कस्टमाइज्ड डाक टिकट की 5000 शीट्स मुद्रित की गई हैं, जिनमें कुल 60,000 डाक टिकटें हैं, और इन्हीं डाक टिकटों का उपयोग विशेष आवरण को विरूपित करने में किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस डाक टिकट और विशेष आवरण के माध्यम से राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान की पहचान देश-विदेश में और अधिक विस्तृत होगी।
राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान के अध्यक्ष प्रो. अनिल सहस्त्रबुद्धे ने बताया कि इस संस्थान की स्थापना 1 मार्च 2000 को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से की गई थी। उनका उद्देश्य प्रौद्योगिकी और पारंपरिक ज्ञान के नवाचार को जमीनी स्तर पर बढ़ावा देना था। उन्होंने यह भी बताया कि अपनी स्थापना के बाद से यह संस्थान जमीनी स्तर पर नए विचारों को प्रभावी समाधान में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इस अवसर पर एनआईएफ इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल के चेयरमैन डॉ. गुलशन राय, राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान के निदेशक डॉ. अरविंद रानाडे और प्रमुख डाकघर प्रवर अधीक्षक पीयूष रजक भी उपस्थित थे। समारोह में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भी वर्चुअली जुड़कर अपनी शुभकामनाएं दीं।