इस दिन शनि देव भी करने जा रहे हैं राशि परिवर्तन। अशुभ परिणामों से बचाएंगे तुलसी के उपाय।
हिंदू शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि ग्रहण की अवधि में सूतक काल के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, जिससे कुछ चीजें अशुद्ध मानी जाती हैं। तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में अत्यंत पूजनीय और पवित्र माना जाता है। ग्रहण काल में भोजन में तुलसी के पत्ते डालने से उसका नकारात्मक प्रभाव कम हो जाता है, जिससे भोजन शुद्ध बना रहता है।
आयुर्वेद में तुलसी को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। ग्रहण समाप्त होने के बाद तुलसी के पत्तों का सेवन करना न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी लाभकारी होता है।
सूर्य ग्रहण के दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित न करें।
ग्रहण काल में तुलसी के पत्ते न तोड़ें। भोजन में डालने के लिए एक दिन पहले ही तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लें।
शनि अमावस्या और सूर्य ग्रहण का यह संयोग विशेष माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी से जुड़े ये नियम अपनाने से अशुभ प्रभावों से बचा जा सकता है।